Friday, November 28, 2014

माय मराठीचा प्रश्न


             नमस्कार मित्र आणि मैत्रिणींनो(?). जवळ जवळ ऐक वर्षानंतर लिहीत आहे. शासनाच्या .(डॉट) GOV .(dot) IN च्या महा जालात असा काही गुंतलो आहे की ब्लॉग ला द्यायला वेळच पुरत नाही. तसे म्हणायला बिन पगारी-पूर्ण अधिकारी म्हणावे अशीच गत आहे आपली. अर्थात पगार मिळतो महिन्याच्या महिन्याला,भरल्या पोटावरून हात फिरवायलाच पाहिजे. तर ते असो.

              माझ्या ब्लॉग च्या प्रोफाईल चे नांव मि माझा असे होते. ते वास्तविकतेत मी माझा असे हवे होते. “मि” आणि “मी” ह्याच्यातली शुध्द चुक माझ्यासारख्या मराठी वांग्मयाच्या विद्यार्थ्याच्या लक्षात एका विज्ञान शाखेच्या व्यक्तीने लक्षात आणुन द्यावी ह्यापेक्षा मोठी शरमेची

Tuesday, October 22, 2013

शोर्टकट तरीके से गणित के सवाल को हल करना

शोर्टकट तरीके से गणित के सवाल को हल करना . आपने परीक्षाओं में एसे सवाल तो अक्सर देखें होंगे जैसे में निचे बता रहा हूँ.

जैसे

उदाहरण :- एक चूहा 50 फीट गड्डे में गिर जाता है. वो उससे बाहर निकलने का प्रयास करता है है वो 5 फीट प्रतिदिन ऊपर चढता है और रात को 4 फीट निचे फिसल जाता है. तो बताओं की वो कितने दिन में बहार निकलेगा.

हल: ऐसे सवालों को हल करने के लिए इनका कोई शोर्टकट तो नहीं परन्तु में आपको समझा देता है मुझे तो वो शोर्टकट ही लगता है.

जैसे वह पांच फीट प्रतिदिन चढ़ता है. और चार फीट वापिस निचे आ जाता है. तो दोनों के बीच में अंतर कितने का हुआ 1 फीट का.

इसलिए वो एक दिन में चढेगा                   = 1 फीट

45 दिन में चढेगा                      = 45 X 1 = 45 फीट

बचा = 50-45 = 5 फीट

तो वह प्रतिदिन चढता है पांच फीट तो वह अगले दिन पांच फीट चढेगा वो बाहर आ जायेगा . इसलिए एक दिन और जुड गया .

45+1 = 46 दिन लगेंगे.

उत्तर         =  46 दिन

उदाहरण : एक छिपकली दीवार में चढ़ने का प्रयास करती है. वह पहले मिनट में दो फीट चढ जाती है. और अगले मिनट में एक फीट निचे आ जाती है.  यदि दीवार की ऊंचाई 10 फीट हो तो वो कितने मिनट में लक्ष्य को छू लेगी.

हल: प्रश्न तो आपने समझ लिया होगा चलो इसको हल करने का प्रयास करते है.

छिपकली दो मिनट में चढती है पहली मिनट+दूसरी मिनट = 2-1 = 1 फीट

अत: है 8 मिनट में वह चढेगी = 8 x 1 = 8 फीट

वह एक मिनट में चढती है 2 फीट तो वह अगले मिनट में चढ़ेगी और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी इसलिए आठ मिनट तो उसको वह लगी + एक मिनट यह लगी तो उसको कुल 9 मिनट लगे.

Wednesday, September 11, 2013

"ईश्वर और भूतप्रेत" अद्भूत एवं अकल्पनीय

 "ईश्वर और भूतप्रेत" अद्भूत एवं अकल्पनीय 

                ईश्वर एवं भूत प्रेतो कि बाते भलेही रहस्य,दंतकथा या मात्र एक खयाली पुलाव माना जाता हो लेकिन सच ये भी है कि इन्हे मानने वाली बहुसंख्य आबादी भी इसी विश्व मे रहती है. एक समुदाय इनमे इन सब चीजों का घोर विरोध करने वाला भी है. “अंधश्रद्धा निर्मुलन समितीया” भारत मे है इसकी जानकारी मुझे भली भाती पता है लेकिन संभव है कि विश्व भर मे भी इनका एक बडा समुदाय वास करता है. मै स्वयं को इन दोनो समुदायो से भिन्न पाता हू. क्यूंकी जैसे मै “ईश्वर” इस संकल्पना मे विश्वास रखता हू जो सकारात्मक उर्जा के प्रतिक मे हम मानते है; तो स्वयं हि इसका दुसरा पहलू जो “नकारात्मक उर्जा” है,भला हम इसे कैसे नजरअंदाज कर सकते है??
                मानवी जीवन मे कई बार हमारे साथ कभी-कभी ऐसी रहस्यमई घटनाऐ घट जाती है तब ना चाहते हुये भी इन भूत-प्रेतो के अस्तित्व पर कोई प्रश्नचिन्ह लगाने का दुस्साहस करने कि हिम्मत नही होती. मेरे खुद के साथ भी ऐसा हि दो बार घटित हो चुका है. उन दोनो घटनाओं का उल्लेख करने से मै खुदको नही रोक पा रहा. आप भी इन्हे पढिये और अपनी अपनी सोच के मुताबिक इसका मतलब निकालीये. लेकिन इसका ऐ मतलब कतई ना निकाले कि अंधश्रधा को अपने इस लेख के माध्यम से मै कोई उर्जा पुरा रहा हू. जो मेरे साथ घटित हुआ वो घटनाऐ मात्र यहा आपके साथ साझा कर रहा हू.
घटना क्रमांक-१
                बात उन दिनो कि है जब मै करीब १४-१५ वर्ष कि आयु का रहा होउंगा. हमारे गाव से करीब ५ कि.मी. के दुरी पर घने जंगलो से घीरा एक पहाड है. हमारे पडदादाजी के जमाने से उस पहाडी के शीर्ष पर एक मंदिर है.

Thursday, January 17, 2013

कालकोठरी से अमर बलिदानी वीर नाथूराम गोडसे का अपने माता - पिता के नाम अन्तिम पत्र;

कालकोठरी से अमर बलिदानी वीर नाथूराम गोडसे का अपने माता - पिता के नाम अन्तिम पत्र;--------------------

परम् वंदनीय माताजी और पिताजी , 

अत्यन्त विनम्रता से अंतिम प्रणाम । 

आपके आशीर्वाद विद्युतसंदेश से मिल गये । आपने आज की आपकी प्रकृति और वृद्धावस्था की स्थिति में यहाँ तक न आने की मेरी विनती मान ली , इससे मुझे बडा संतोष हुआ है । आप के छायाचित्र मेरे पास है और उसका पूजन करके ही मैं ब्रह्म में विलीन हो जाऊँगा । 

लौकिक और व्यवहार के कारण आप को इस घटना से परम दुःख होगा इसमें कोई शक नहीं । लेकिन.................

Tuesday, January 15, 2013

एक खरी प्रेमकथा..... Break-Up Ke Baad :'(

एक खरी प्रेमकथा.....
Break-Up Ke Baad :'(..

...
मुलगी :तुझी नविन गर्लफ्रेँन्ड खुप
छान आहे
(तीने चांगलचं Impress केलं असेल)
...
मुलगा : हो आहेचं ती
(पण सर्वात सुंदर मुलगी माझ्यासाठी तुचं आहेस)
...
मुलगी : मी ऐकलयं ती खुप Stylish n
Joking आहे
(ह्यातलं माझ्यात काहीचं नव्हतं म्हणुन आपलं Break-Up झालं वाटतं...)
...
मुलगा : असेलही
(पण तुझ्यासमोर ती काहीचं नाही)
...
मुलगी : मला आशा आहे
तुम्ही शेवटपर्यँत
खुश राहाल
एकत्र राहाल (:
(कारण आपण शेवटपर्यँत पोहोचलोचं नाही)
...
मुलगा : I Hope So आम्ही राहू
(पण आपण नातं का नाही टिकवू शकलो ? का शेवटपर्यँत पोहचू शकलोनाही ?)
...
मुलगी : Well आता मी निघते Bye..
(माझं रडणं सुरु व्हायच्या आत )
...
मुलगा : हा मी पण निघतो
(Plz इथुन गेल्यानंतर तु रडु नकोस)
...
मुलगी : Bye
(मी अजुनही खुप प्रेम करते तुझ्यावर)
...
मुलगा : भेटु परत..:-(
(तुझ्यावर प्रेम कारायचं कधीचं थांबवू शकत नाही)....:)
...
आयुष्यात प्रत्येक
गोष्टीला दुसरी बाजू असते,
आणि
आयुष्यात अशी काही माणस
असतात .....
ज्यांची जागा दुसरं कुणीचं घेऊ शकत,
आयुष्यात कितीही माणसंयेऊ देत
ते नेहमीचं
Special असतात आणि राहतात...

Wednesday, January 9, 2013

चलो आधार कार्ड बनाने वाले आये है


आधार कार्ड बनाने का कैम्प गाव मे खुला. पिछली बार किसी स्मार्ट कार्ड बनाने कि मोहीम के दरमियान हुई अव्यवस्था और मारपीट से संज्ञान लेकर इस बार वार्ड के हिसाब से लोगो को बुलाया गया........ अब सरकारी कार्ड है तो कुछ नं कुछ फायदेवाला मामला हि होगा, ये सोच कर ग्रामसभा कि तरफ सालो साल रुख न करनेवाले लोगो के हुजुम के हुजुम उलटने लगे. अपना नंबर लगाने कि जुगत शुरू हो गई. चल फिर न सकनेवाले बुढे,यहा तक कि मरीज लोगो तक को उनके परिजनोंद्वारा कैम्प मे लाया गया.......... कुछ जुगाडू किस्म के लोग नंबर पहले लगाने का जुगाड करने का प्रयास करने लगे. जब कुछ जुगाड न हो सका तो खिज कर दोबारा कतार मे लगे........ ऑफिस के बाहर खडी कतार धीरे धीरे आधार कर्मचारियो के आजुबाजू जमा होने लगी. फिरसे लोगो के झगडे चालू होने कि नौबत......कतार का नामोनिशान लगभग खत्म होने कि कगार पर.....भीड का हो हल्ला देख कर ग्रामपंचायत का पियक्कड चपरासी लोगो पर झल्लाना चालू कर देता है .........इस पर लोग उसे उसी कि झल्लाहट से चूप बैठने को केहते है.......चपरासी सहम कर बैठ जाता है......बाहर बैठा एक गांव का हि लडका जो लोगो के फॉर्म भरके उनकी मदद करता है, अंदर आकर लोगों से शांत रेहने कि अपील करता है.......जैसे हि उसकी अपील खत्म होती है भीड के बीच मे से हि कोई व्यक्ती जय हिंद जय भारत का एक नारा जो भाषण समाप्त होते हि वक्ता बोलता है, लगभग उसी स्वर मे बोलता है.......अपील करनेवाला लडका लोगो के चीढाने वाले रवय्ये से कुछ ना बोलते हुये वहा से निकल जाता है.....................कतार के अंत मे खडी कुछ महिलाये जो गांव नाते से दादी लगती है कान मे बुदबुदाती है कि पोते के जमाने मे क्या दिक्कत हो रही है........                                                                                                               बेटा नंबर जल्दी लग सकता है क्या?????                                                ........जवाब कुछ नही.......अनसुना करके वहा से निकल जाने के अलावा और कोई  पर्याय भी क्या बचता है?  बीच मे हि एक खडूस रवैय्ये का आदमी वहा आके हो हल्ला मचाता है........केहता है कि,                                                                         अंदर कुछ काला पिला हो रहा है....अपने अपने खास आदमियो का पहले नंबर लगाया जा रहा है........                                                                              वास्तव मे ऐसा कुछ भी नही हो रहा......पता नही किस सी.बी.आई. से उसे रिपोर्ट मिली थी. कायदे और कानून कि बात करने वाला वो व्यक्ती अपने पिता कि हत्या के लिये पहलेसे हि कुख्यात है.........मामला थोडी देर बाद शांत होता है........कतार मे धीरे धीरे लोग जुडते रेहते है........जिनकी कार्ड बनाने की प्रक्रिया पुरी हुई वो लोग खुशी खुशी निकल जाते है........कतार खत्म होने का नामोनिशान नही.....बीच बीच मे आधार वालो का कम्प्युटर दगा देता रेहता है......वो भी हैराण परेशान.......!!!                                                                सरकारी कार्ड बनाने की प्रक्रिया चलती रहती है.              

Sunday, January 6, 2013

"मैंने गाँधी को क्यों मारा " ? नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान,,,,


"मैंने गाँधी को क्यों मारा " ? नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान,,,,

{इसे सुनकर अदालत में उपस्तित सभी लोगो की आँखे गीली हो गई थी और कई तो रोने लगे थे एक जज महोदय ने अपनी टिपणी में लिखा था की यदि उस समय अदालत में उपस्तित लोगो को जूरी बना जाता और उनसे फेसला देने को कहा जाता तो निसंदेह वे प्रचंड बहुमत से नाथूराम के निर्दोष होने का निर्देश देते }

नाथूराम जी ने कोर्ट में कहा --सम्मान ,कर्तव्य और अपने देश वासियों के प्रति प्यार कभी कभी हमे अहिंसा के सिधांत से हटने के लिए बाध्य कर देता है .में कभी यह नहीं मान सकता की किसी आक्रामक का शसस्त्र प्रतिरोध करना कभी गलत या अन्याय पूर्ण भी हो सकता है .प्रतिरोध करने और यदि संभव हो तो एअसे शत्रु को बलपूर्वक वश में करना..........

Sunday, November 25, 2012

प्राजक्त


प्राजक्त
मित्रांनो, प्राजक्त आपल्याला परिचयाचा आहेच. पारिजातक देखील म्हणून बराच प्रसिद्धी पावलेला हा वृक्ष पृथ्वीवरील अस्तित्वात असलेल्या सात देववृक्षांपैकी एक वृक्ष आहे.(मला फक्त तुळस आणि पारिजातक असे फक्त दोन देववृक्ष माहित आहेत. बाकीचे पाच कुणाला माहित असतील तर कृपया अवश्य कळवावे,फार उपकार होतील J).
प्राजक्ताला पौराणिक महत्वही खूप आहे. प्राजक्ताचे झाड स्वर्गातून कृष्णाने पृथ्वीवर आणले. हे झाड कोठे लावावे यावरून सत्यभामा आणि रूक्मिणी यांच्यात वाद झाला. कृष्णाने ते सत्यभामाच्या अंगणी अशा ठिकाणी लावले की फुले उमलल्यावर रूक्मिणीच्या अंगणात पडावे.
अशी आख्यायिका प्रसिद्ध आहे. असो.......
प्राजक्ताची झाडे जंगलात मुक्त स्वरूपात खूप असतात. आजकाल बरयाच घरी अंगणात हा झाड दिसतो. वर्षातून फक्त दोन-अडीच महिनेच ह्याला फुले लागत असतात. आणि तरीपण जर प्राजक्ताला आपल्या परसात स्थान मिळतो म्हटल्यावर नक्कीच प्राजक्ताचे महत्व खूप वाढते.

Thursday, November 15, 2012

माय मराठी(विडंबन)


वैदर्भी बोली खरेतर संस्कृतशी अधिक जवळीक असणारी. मात्र तिची खुमारी पाहायची असेल तर बुवा उपाध्यांची भागवत गीता वाचावी. भागवत गीतेशी एवढा लडिवाळपणा करण्याची हिम्मत दुसऱ्या कोणत्या भाषेची वा बोलीची झाली असेल असे वाटत नाही.

बुवा लिहितात-

पार्थ म्हणे गा हृषीकेशी !
या युद्धाची येशी तैशी !
बेहेत्तर आहे मेलो उपाशी !
पण लढणार नाही !

धोंड्यात जावो हि लढाई !
आपल्या बाच्याने होणार नाही !
समोर सारेच बेटे जावाई !
बाप दादे काके !

Sunday, November 4, 2012

काही मराठी विनोदी संभाषण


Marathi Joke : काही मराठी विनोदी संभाषण

बोलणारा(उघड):साहेब देव्याच्या कृपेने एकदाचा माझा मुलगा पास झाला.
ऎकणारा(मनात):(मग काय गावभर पेढे वाटू?)

बोलणारा(उघड):साहेब आज मी नवीन हिरो होंडा मोटर सायकल विकत घेतली
ऎकणारा(मनात):(बाकीचे काय फुकट घेतात की कायरे भडव्या
 ?)

बोलणारा(उघड):साहेब ५ वर्षे झाली, आता तरी माझं प्रमोशन करा की?
ऎकणारा(मनात):(लेका तुझं प्रमोशन म्हणजे माझी जागा आहे। ती तुला कशी देऊ?)

बोलणारा(उघड):साहेब बढती मिळाली, उद्या पार्टी ठेवली आहे.
ऎकणारा(मनात):(एवढी वर्षे चमचेगिरी केली त्याचा फायदा झाला म्हणायचा.)

बोलणारा(उघड):ही माझी बायको, पल्लवी
ऎकणारा(मनात):(ह्या माकडाला मस्त चिकनी बायको मिळाली. मजा आहे साल्याची.)

बोलणारा(उघड):हे फोटोंचे अल्बम पाहात बसा.
ऎकणारा(मनात):(आग लावा त्या अल्बम्सना, वैताग साला.)

बोलणारा(उघड):साहेब मला उद्या सुटी मिळेल का?
ऎकणारा(मनात):(अरे?उद्या तर मला तुझ्या बायकोला पिक्चरला घेऊन जायचे होते.)

Monday, October 22, 2012

पुनर्जन्म........!!


                        पुनर्जन्म........!!
Anjali When she was 2 years Old 
पुनर्जन्म........!! एक कपोलकल्पित,आभासी,रहस्यमयी आणि विलक्षण संकल्पना म्हणून आधीही आणि आजही चवीने चर्चिला जाणारा विषय आहे. पुढेही ह्यावर वादविवाद,तर्कवितर्क आणि चर्चा चालूच राहणार आहेत. विज्ञान आणि अध्यात्माला मानणारे उपासक लोकं पुनर्जन्माला आप आपल्या तऱ्हेने वेगवेगळ्या दृष्टीकोनातून पाहतात....! अगदी स्पष्टच सांगायचे झाल्यास वैज्ञानिक दृष्टीकोन ठेवणाऱ्या व्यक्ती जास्तीत जास्तपणे पुनर्जन्माला फक्त एक आभासी संकल्पना म्हणून पाहतात. त्याला कारणही अगदी तसेच आहेत. वैज्ञानिक दृष्टीकोन कुठल्याही बाबींसाठी शास्त्रीय पुराव्यांचा आधार मागत असतो. नेहमी आध्यात्म आणि विज्ञान ह्यामध्ये शीतयुद्ध ह्याचसाठी चालत असतात.
     पण मानवी मानवी आयुष्यात अश्या काही रहस्यमयी घटना घडून जातात ज्या पुनर्जन्म ह्या विषयावर आपणांस विचार करायला भाग पाडतात. आणि पुनर्जन्माच्या संकल्पनेला आधार म्हणून अशाच घटना एक सबळ आधार देखील ठराव्यात. कारण आध्यात्म आणि वैज्ञानिक दृष्टीकोनाच्या शीतयुद्धात नेहमीच वैज्ञानिक दृष्टीकोन काही अंशी माघारलेला असतो.
     विषयाच्या अनुषंगाने मला काही घटनांचा उल्लेख इथे करावासा वाटतो-

Tuesday, October 16, 2012

गूगल फ्री एसएमएस सर्विस

गूगल ने भारत समेत कई देशों में अपनी नई एसएमएस सर्विस लांच कर दी है। इस सर्विस की मदद से आप दोस्तों और फै‌मली मेंबर्स को फ्री एसएमएस भेज सकते हैं। भारत में गूगल की इस नई सुविधा को रिलायंस, एमटीएस, टाटा इंडीकॉम और वोडाफोन के साथ लगभग सभी बड़े मोबाइल सर्विस ऑपरेटर सपोर्ट कर रहे हैं। हम बताते हैं कि आप कैसे गूगल की इस फ्री सर्विस का लाभ उठा सकते हैं।

Monday, September 24, 2012

मुफ्त SMS सेवा प्रदाता साईट्स कि सूची

नमस्कार मित्रो
                     हम इंटरनेट के जरिये मुफ्त मे SMS अक्सर भेजते हि रेहते है. हम कुछ प्रसिद्ध वेबसाईट हमेशा या, ज्यादातर इस्तेमाल करते है उनमेसे हमे कुछ गिने चुने साईट्स हि पता होती है जैसे www.way2sms.com , www.ultoo.com ,www.160by2.com आदी .......... . लेकिन क्या हो यदी लगभग १०० से भी ज्यादा ऐसी साईट्स आपको एक हि जगह मिल जाये तो....................................तो पेश है आपकी सेवा मे मुफ्त sms कि सेवा प्रदाता वेब साईट्स-

जी.पी.आर.एस. कि सेटींग्स भाग-१

मित्रो नमस्कार.
                       आज का युग तंत्रज्ञान के केंद्र के इर्दगिर्द घुम रहा है. इंटरनेट ने विश्व को मानो आपके हाथो मे सोप दिया हो. आज से आठ दस साल पहले इंटरनेट का इस्तेमाल बहोत खर्चिला एवं समय कि बरबादी करनेवाला माना जाता था. हमे अपने ई-मेल भी देखने इंटरनेट कॅफे का रुख करना पडता था. लेकिन मोबाईल क्रांती ने इंटरनेट को भी आम आदमी के मोबाईल मे भी स्थान बडी आसनी से पा लिया है. आज मोबाईल का जितना इस्तेमाल कालिंग और लघु संदेशोके आदानप्रदान मे किया जाता है लगभग ठीक उतना हि उसकी मदद से इंटरनेट के इस्तेमाल के लिये भी किया जाता है. बस आपके पास एक GPRS तंत्रज्ञान से युक्त एक मोबाईल फोन होने कि आवश्यकता होती है. उसमे इंटरनेट कि सेटींग्स वैसे तो सीम इन्सर्ट करने के उपरांत अपने आप इन्स्टाल होती है. लेकिन की बार इसमे कठीनाई आ जाती है. ऐसे मे मेनुअल सेटींग्स डाल के आसानी से नेट चलाया जा सकता है. तो आपके सेवा मे कुछ मेनुअल सेटींग्स मै देने का प्रयास कर रहा हू. यदी      ये जानकारी आपके थोडेसे भी काम मे आई तो मेरा उद्देश सफल हो जायेगा   

Monday, June 18, 2012

क्षत्रिय जातीयोंकि सूची

नमस्कार मित्रो.
                      भारत के महान इतिहास मे राजपूत समाज का बहोत अतुलनीय योगदान है. समय चक्र के साथ साथ राजपूत समाज संपूर्ण भारत मे राजस्थान से निकलकर विविध स्थानो पर बस गया. इसके लिये तत्कालीन राजनीतिक एवं सामरिक  परीस्थितीया भी एक महत्वपूर्ण कारण थी. इसके अलावा  राजस्थान एक बहोत बडा मरुस्थल है. जिसकी वजह से बरसात बहोत कम होती है. किसानी करना अपने आप मे वहा पर बहोत बडी समस्या है. स्थलांतरण कि वजह से बहोतसी मौलिक ऐतिहासिक जानकारीयोंपे एक लुप्तता कि चादर चढती गयी और हमे अपनी जाती तो याद रही किंतु  गोत्र,वंश,मूल स्थान कि जानकारीया कही भूल सी गई. मांगलिक कार्य हेतू गोत्र,वंश एवं कुल दैवत का नाम पता होना काफी महत्वपूर्ण होता है. प्रस्तुत लेख मे मैने १५३ क्षत्रिय जातीयोन्के नाम,गोत्र,वंश और उनके मुल स्थान संकलित किये है. जल्द हि सभी जातियो कि कुल दैवत के नाम भी मै प्रकाशित करने का यत्न करूंगा. यदी आपके पास भी कोई महत्वपूर्ण जानकारीया मौजूद हो तो कृपया साझा करे.

राजपूतों की वंशावली
आईये जाने राजपूत वंश के बारे मे.........

Tuesday, December 20, 2011

आचार्य अत्रे-4

ek ashilil vinod
ekda atre balant jhalelya bai la baghyla gele tar tyani kai wicharave?
"kai bal-bil bara aahe na?"
अत्रे एकदा पॅन्टच्या दोनही खीश्यात हात घालुन उभे होते.
बाजुच्या मित्रांन मिस्कीलपणे विचारल."काय बाबुराव काय चालल आहे"
त्याच्या विचारण्याचा रोख लक्षांत आला होता ते म्हणाले."काहि नाहि. पण जे तुमच्या मनांत आहे ते
माझ्या हातात नाहि.."
दत्तो वामन पोतदार अत्र्यांचे खास मित्र.
त्यांना एकदा अत्र्यांची चेश्टा करण्याची हुक्की आली.
भेटल्यावर त्यांनी अत्र्यांना विचारल " काय आल्हाद बेचव पत्रे बरे आहे ना"
अत्रे उत्तरले " होय ठिक आहे वात्तो दामन मोत्तदार."
शनिवार वाड्यावर अत्र्यांची सभा चालु होति.
अत्र्यांचि सभा म्हणजे धमाल, हशा आणि टाळ्या.
सभा खुप रंगली होति. पण रात्र पण झाली होति त्यामुळे त्यांनिभाषण आवरत घ्यायला सुरवात केली. पण श्रोत्यांना अजुनभाषण ऎकायच होत. आजुन बोला, आजुन बोला, म्हणुन गलका सुरु झाला.अत्र्यांनी शांत पणे घड्याळ्याकडे बघितल अन म्हणाले "रात्रीचे बारा वाजत आले आहेत, जवळजवळ झोपायची वेळ झाली आहे म्हणुन भाषण आवरत घेत आहे"यावर सारी सभा हास्यात बुडुन गेली..
असा वक्ता होणे नाहि..
Ekda Atranchya 'Shivshakti'chy a baher ek gadhav marun padla hota don diwas zale, ghan sutli pan corpoation wale te uchlat navhate. Mag chidun atryanni tyanna phone kela.
Atre : Aho kay he, 2 diwas gadhav melay ithe rastyawar atatari uchla ki.
Corp wala : Aho Atre, Hindu sanskuti madhe mrutanchya natevaikanna pratham kalawtat tevha tyanna adhi kalwa magahun amhi mansa pathwto.
Atre : Arechcha, mala kay sanskruti mahit nahi, natewaik mhanunach tumhala pratham phone karto ahe.
Sangaychi garaj nahi nantarchya tasabharat te gadhav tethun uchalale gele.
Sahityikanmadhy e Pra Ke Atryanvar vishesh tippani karnare Ma Ka Deshpande.
Ekda Atre yanni prevaesh kelyavar Ma Ka Deshpande itarejananna pahun udgarle, 'dekho, ye aa gaya hai P.K.'
Atryancha hajar jabab hota ' haan, teri Maa ka'
assal marhathi humour to atryancha humour - thodasa bochra pan hasavnara.. fulora vaglun sarva kahi..

आचार्य अत्रे-3

एकदा संयुक्त महाराष्ट्राच्या चळवळी मध्ये यशवंतराव चव्हाणांनी आत्र्यांना विचारले होते की चळवळीच्या"स्लोगन " मध्ये
... संयुक्त महाराष्ट्र""झालच"" पाहिजे
तर या स्लोगन मध्ये ""झालाच"" हा शब्द का हवा आहे?
/////////// ++++++++++++++++ +++++++++++//// //////////////
तर आत्र्यांनी विचारले की जर तुमच्या आडणावतून'च' कढून टाकलं तर तुमचे आडणाव काय होइल? "यशवंत राव व्हाण" होईल
तेच महत्व इथे""झालच"" पाहिजे चे आहे ....
/////////////// ////// ===============/ //////////////// ////////
एकदा ना.सी.फ़ड्के अत्र्यांना म्हणाले की वाक्यात स्वल्पविरामाचा नक्की उपयोग काय?
अत्रे म्हणाले योग्य वेळ आल्यावर मी सांगेन.त्यानंतर फ़डके यांच्या पत्नीला अत्रे भेटले असता ते म्हणाले,
"मी तुझा नवरा तु माझी बायको आपण सिनेमाला जाऊ."
झाले ही गोष्ट फ़डके यांच्या लगेच कानावर आली.त्यांनी अत्र्यांकडे खुलासा मागितला तेव्हा अत्रे म्हणाले,
"मी, तुझा नवरा, तू, माझी बायको आपण सिनेमाला जाऊ......"
Atre ani Fadke
Are ani fadke yanche vair jagjahir hote.
Ekda fadke yani tyanchya mukhpatrat ek vyangchitra kadhale, tyat ek kutra tyani dakhvila, ani khali lihile 'Ater-Kutre'.
Dusrya divashi atryni tyanchya agralekhat ek vyangchitra kdhale, tyat toch kutra tang var karun sodtana dakhvile, ani tyachya khali ek fadke taklele hote. Tyachyakade point karun atryani fakt 'Fadke' ase lihile

आचार्य अत्रे-2

एकदा अत्रे नदिवर नहात होते .
तेथे कपडे धुनार्या बाई ला त्यांची गम्मत करावी वाटली
तिने अत्रांच्या मोठ्या पोटा कडे पाहून विचारले
" हा माठ कसा दिला ?
त्या वर अत्रे म्हणाले .
माठ नुसता पाहिजे का नळ सकट पाहिजे ?
एकदा अत्रे रेलवे रूला शेजारून चालले असतात!त्यांच्या शेजारून कोलेज ची मुले चालली असतात !
त्यातला एक मुलगा अत्रे याना सतवायाचे थरावातो! तो अत्रे ना विचारतो हे काय आहे? (रुळ दाखवून )
अत्रे : रुळ आहेत !
मुलगा : त्याच्या खाली काय आहे ?
अत्रे : लाकडी स्लिप्पर आहेत .
मुलगा : त्याच्या खाली काय आहे ?
अत्रे : खडी आहेत .
मुलगा : त्याच्या खाली काय आहे ?
अत्रे : माती आहे .
मुलगा : त्याच्या खाली काय आहे ?
अत्रे : मुरुम आहे .
मुलगा : त्याच्या खाली काय आहे ?
अत्रे : माझा बाप आहे .
मुलगा विचार करतो अत्रे आता चिडले आहेत .
मुलगा : त्याच्या खाली काय आहे ?
अत्रे : तुझी आई आहे .
मुलगा लगेच तिथून सतकतो . (काल्पनिक )
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.एका नेत्या बद्दल अत्रेंचे मत काही चांगले नव्हते. ह्या नेत्याची उंची सुद्धा जेमतेमच होती. अत्र्यांच्या धिप्पाड देहासमोरते अगदीच खुजे दिसायचे.
अत्र्यांनी त्यांच्याबद्दल बरेच प्रक्षोभक भाषण केल्यामुळे नेतेराव खवळले व तिरमीरीत येउन अद्वातद्वा बोलायला लागले.अत्रे हे अतिशय अश्लील बोलतात
असे ते म्हणु लागले. हे ऐकताच अत्रे म्हणाले,"अहो, तुम्ही माझ्या समोर उभे राहिले असता, तुम्हाला माझे अश्लील असेच दिसणार."
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